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बालगीत

हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा रचित पीर बीर फत्ते बाल गीत इक रहें ईर एक रहेंन बीर एक रहें फत्ते एक रहें हम ईर कहेंन चलो लकड़ी काट आई बीर कहेंन   चलो लकड़ी काट आई फत्ते कहेंन   चलो लकड़ी काट आई हम कहें चलो, हमहू लकड़ी काट आई । ईर काटें ईर लकड़ी बीर काटें बीर लकड़ी फत्ते काटें तीन लकड़ी हम काटा करिलिया   । ईर कहिन्   चलो गुलेल बनाई बीर   कहिन्   चलो गुलेल बनाई फत्ते   कहिन्   चलो गुलेल बनाई हम कहा चलो, हमहू गुलेल बनाई । ईर बनायेन ईर गुलेल बीर बनायेन बीर गुलेल फत्ते बनायेन तीन गुलेल और हमार कट-कुट गयेयी । ईर कहेंन चलो चिड़िया मार आई बीर कहेंन चलो चिड़िया मार आई फत्ते कहेंन चलो चिड़िया मार आई हम कहा चलो, हमहू चिड़िया मार आई । ईर मारेंन ईर चिड़िया बीर मारेन बीर चिड़िया हम मारा ....फुदकिया । ईर कहेंन चलो भूंजी पकाएं बीर कहेंन चलो भूंजी पकाएं फत्ते कहेंन चलो भूंजी पकाएं हम कहा, हमहू भूंजी पकाएं । ईर भुन्जेंन ईर चिड़िया बीर भुन्जेंन बीर चिड़िया फत्ते भुन्जेंन तीन चिड़िया हमार जल-जुल गयी   । ईर कहेन चलो राजा के सलाम करी आई बीर कहेन चलो राजा के सलाम करी आई फत्ते कहेन चलो राजा के सलाम करी आई हम कहा हमहू चलो, राजा के