Sunday, May 28, 2017

पोट्रेट्स : बाल नाटिका

पोट्रेट्स
निर्देशक :- श्री संजय गर्ग , सहयोग कुमारी मनीषा तिवारी
संगीत    :- डा  शिप्रा सुल्लेरे सहयोग :- कु. मुस्कान सोनी, साक्षी
लेखक    :- गिरीश बिल्लोरे एवं कु. वैशाली बरसैंया
प्रापर्टी    :-
लाईट इफैक्ट्स :-
गायन :-
प्रस्तुति :- संभागीय बालभवन जबलपुर मध्यप्रदेश    
 अक्सर उसे किसी न किसी को अपमानित करते अथवा किसी की चुगली करते देखना लोंगों का अभ्यास सा बन गया था .  सुबह दोपहर शाम निंदा और चुगलियाँ करना  उसके जीवन का मौलिक उद्देश्य था . कई लोगों ने कई बार सोचा कि उसे नसीहत दी जावे पर इस प्रकार का काम करने का लोग जोखिम इस वज़ह से नहीं उठाना चाहते क्योंकि वे जानते हैं कि अति के दुःखद परिणामों का आना निश्चित ही होता है .
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मैं अनुज  हूँ एक आर्टिस्ट मेरी उम्र पर मत जाना मेरे अनुभव से सीख ले सको तो सीख लेना........ आप क्या जानें मेरी अपनी इस छोटी से उम्र ने वो कुछ मुझे सिखाया है जो सौ साल जीने वालों को हासिल नहीं होता आसानी से .... मेरी उम्र जी मेरी उम्र ......... वर्ष है. मुझे याद है वो रात जब मैंने खुद को पहचाना था ...
(दृश्य परिवर्तन मंच पर घुप्प अन्धेरा छा जाता है )
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पर्दा फिर से खुलता है
टीचर  :- अनुज ये क्या ...... क्लास रूम में तुम्हारी हरकतें बिलकुल ठीक नहीं है
अनुज :- मैम सारी ,   अब दोबारा नहीं होगा..
टीचर  :- ठीक है ... पर बताओ बना क्या रहे थे...
अनुज :- क क क कुछ नहीं ...
टीचर :- (रौब से )  बताओ बताओ...
अनुज :- ( कांपते हाथों से .... नोट बुक देते हुए ).... जी कुछ नहीं सौरी मैम ..
टीचर  :- ये क्या .... किसकी तस्वीर बनाई है ये अर्रर ए .... ये तो मैं हूँ 
सारे बच्चों को तस्वीर दिखातीं हैं इस बीच तस्वीर में एक टीचर ब्लैक बोर्ड पर कुछ लिखते हुए नज़र आ रहीं हैं पर सर पर सींग नज़र आ रहे हैं.  
अनुज :- सोरी मैम अब ये दोबारा न होगा प्लीज़....
टीचर  :- जाओ दीवार की ओर मुंह करके खड़े हो
अनुज :- प्लीज़..............
टीचर  :- नो ....... पनिशमेंट मीन्स पनिशमेंट ओ के
अनुज दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा हो जाता  है..
सारे बच्चे आपस में फुसफुसाते हुए बात करते हैं मैडम मेज़ पर डस्टर ठोंक चीकतीं हैं.. कीप-मम 
सभी बच्चे शांत हो जाते हैं तभी छुट्टी की घंटी बज उठती है.. बच्चे बस्ता बाँध के घर जाने के लिए उठ खड़े होते है इस बीच अनुज को भी टीचर  जाने की इजाजत देतीं हैं..  
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चोर चोरी छोड़ सकता है पर हेराफेरी नहीं अनुज अपनी हरकतों से बाज कहाँ आता सुबह से ही नीतू  का पोट्रेट बनाया और चेहरे की जगह  बकरी का मुंह  बनाया . टीचर के आने के पहले सामने जाकर सभी बच्चों को अपनी कला कृति दिखाते हुए बोलने लगा  ..    
अनुज :- जानते हो ये कौन है..
सभी बच्चे समवेत स्वर में   :- आधी बकरी आधी लड़की
अनुज :- लड़की कौन है..?
सभी बच्चे समवेत स्वर में   :- नहीं बिलकुल नहीं ?
अनुज :- अंदाज़ लगाओ.. जो टीचर के सामने मिमियाती है.
सोनू   :-  प्रज्ञा ........?
प्रज्ञा  :-   सोनू, तुम्हारी शिकायत करती हूँ टीचर से
अनुज :-  हाँ ज़रूर करना वो सींग मारेंगी
(सभी बच्चे खिलखिलाकर हँसते हैं.. )
अनुज :-  न गलत ज़वाब.. और सोचो ..?
नीतू    :-  मुस्कान .........
अनुज :-  न गलत ज़वाब ....... आप गेम से बाहर .......
तभी मुस्कान कक्षा में प्रवेश करती है... अनुज ने मुस्कान से पूछा – ये किसका चित्र है...?
मुस्कान :- बकरी.......
अनुज :- बकरी का का मुंह है लड़की का नाम बताओ  ?
मुस्कान :- हिंट दो... ?
अनुज :- जो टीचर के सामने मिमियाती है. 
मुस्कान, पलक , प्रज्ञा सोनू एक स्वर में :- नीतू .........
अनुज :- सही पकड़ें हैं .......
नीतू   :- शटअप अनुज ....... !  अनुज मैं जा रही हूँ प्रिंसिपल जी से शिकायत करने . 
अनुज :- जाओ जाओ ..... क्या करेंगे प्रिंसिपल ........ ये लो ये रहे प्रिंसिपल सर्रर्र ......!
                     ( अपने बस्ते से एक फोटो निकाला  रीछ के मुखौटे वाला चित्र निकाला  जिसके नीचे लिखा था “कट्टपा, प्रिंसिपल जनता स्कूल बल्दी कोरी की दफाई जबलपुर  ” )
तभी मैडम के आने की आहट सुन बच्चे अपने अपने जगह पर बर्फ सरीखे जम जाते हैं.. और एक स्वर में गुड मार्निंग मैडम ...
टीचर :-  गुड मार्निंग बच्चो  ... आज किसी ने मस्ती  नहीं की...
बच्चे :- नो मैडम जी .......
टीचर :- अनुज कहाँ है..... कोई शरारत की तुमने..
अनुज :- जी नहीं  मैम
टीचर :-  ( मुस्कुराते हुए ) सिट डाउन .. बताओ बच्चो ..... भारत ने किस सबसे बड़ी राष्ट्रीय  समस्या का हल निकाल लिया है
रैंचो..... टीचर जी मैं बताऊँ ...............?
टीचर :- हां बताओ.. बताओ......... साल भर बीतने को आया आज रैंचो जी ने खुद कहा की वो जवाब देंगें बच्चो.. ठोको ताली..
तालियों बजतीं हैं और बच्चे एकाएक शांत हो जाते हैं... और .......
रैंचो का ज़वाब आता है :- मैडम जी मैडम जी ....... अब पता चल चुका है कि कटपपा ने बाहुबली को क्यों मारा .. !
टीचर सहित सभी ज़ोरदार ठहाके लगाते हैं.. और रैंचो.. ऐसा खुश होता है जैसे वो लालबुझक्कड़ है..
टीचर :- हाँ तो लाल बुझक्कड़ जी बैठ जाइए ... पर ये बताइये कि ये राष्ट्रीय समस्या कैसे हुई ?
रैंचो :- एक बार टीवी पे मोदी जी ने शायद से इस बारे में कुछ कहा था ..? जब देश के प्रधान मंत्री बोलते हैं तो राष्ट्रीय  समस्या पर ही बोलते हैं न मैम जी ..
( और फिर एक बार ठहाके गूंजते हैं.. पर अनुज सर झुकाए कुछ काम करता नज़र आता हैं मैडम को लगता है कि शायद अनुज कोई होमवर्क पूरा कर रहा है.. )
टीचर :- और क्या क्या हैं राष्ट्रीय समस्या ..
रैंचो :- नोट बंद होना, पालीथीन का उपयोग .. और तीन.......
टीचर :- बस बस आगे मत बोलना भाई..
                               पीरियड चेंज होने की घंटी सुनाई देती है .. टीचर जी क्लास के बाहर निकल पड़तीं हैं.. अनुज तब तक अपना काम पूरा  कर सारे बच्चों को बताता है......... ये देखो आज का हीरो ..........
इस बार एक गधे के चित्र पर रेंचो का चेहरा देख बच्चे हंसने लगते हैं . रैंचो अनुज को मारने दौड़ता है ..
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तभी एनवायरमेंट  साइंस  टीचर  कमरे में आती हैं ........ सारे बच्चे बड़े अदब से गुड मार्निंग मैडम बोलते हैं और
टीचर :- श्रेया कल हम कहाँ थे..
श्रेया  :-  साउथ एवेन्यू माल में ..
टीचर :- ये क्या बोल रही हो...?
श्रेया :- सही है मैडम आप सर और आपकी सास माल में मिले थे न शाम को ?
टीचर :- अरे पागल मिले तो  थे.. पर क्लास में मैंने क्या पढ़ाया था ?
श्रेया  :-   मैम कल आपने पूछा था की सबसे अधिक हाथी कहाँ पाए जाते हैं ..?
टीचर :-  हां तो बताओ कहाँ मिलते हैं.. ?
श्रेया :-   मैम  माहिष्मती साम्राज्य में ........
             और फिर एक बार बच्चे जोर से हंसते हैं .. तभी सीता बाई प्यून टीचर जी को ये बताती है ... कि
सीता बाई :- मैडम, आपको प्रिंसीपल सर बुला रहे हैं .. और मैडम प्रस्थान करतीं हैं
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टीचर जी के जाते ही क्लास रूम वैसा ही हंगामेदार हो जाता है...
शुभि :- तुम हमेशा परेश के छोड़ देते हो उसका मज़ाक नहीं करते ........
अनुज :- ( परेश ..की ओर मुड़ता है ) बता दूं ......
परेश :- .............अयं क्या बताओगे ..... न मैं कद्दू हूँ न आलू तुम मुझे क्या कहोगे .. बताओ बताओ
           अनुज :-  सुनो सुनो सुनो.. परेश की कहानी सुनो ......
            समवेत आवाज़ में  :- सुनाओ सुनाओ सुनाओ ...... परेश की कहानी सुनाओ ...
            अनुज :- एक बार मैं परेश के घर गया था... परेश उसके दौनों बड़े भाई ..... घर का सारा काम कर रहे थे
            सारे बच्चे :- फिर क्या हुआ ..?
             परेश :- हाँ तो मम्मी पापा के साथ घर का काम कराने में क्या कोई बुराई है क्या.. ?
            सारे बच्चे :-  बिलकुल नहीं ..
           अनुज :-     बिलकुल नहीं बुराई क्या है ... पर जब परेश ने कहा ....... अनुज ये पकौड़े मैंने बनाएं हैं तब याद है आंटी ने क्या कहा था...?
          परेश :- बोलो बोलो क्या कहा था.. ......? अरे मत बोलो समझ गया मम्मी ने क्या कहा था.. (झपट कर अनुज का मुंह बंद करने लगा )
        अनुज :- आंटी ने कहा था .. नरेश चाय अच्छी बनाता है, दिनेश सब्जी अच्छी बनाता है.. और परेश ... पकौड़े ..?
      सारे बच्चे .. :- तो क्या हुआ ..
      अनुज :- अरे आंटी ने फिर कहा था न ....
      सारे बच्चे – क्या कहा था.. बताओ बताओ ..
      अनुज :- आंटी ने कहा था.. मेरी कोई छोरी नहीं हैं.. पर मेरे छोरे कोई छोरियों से कम है के.. ?
सारे क्लास रूम में ठहाका गूँज गया ... और सबने परेश को मिस परेश, मैडम परेश कहना शुरू कर दिया.
परेश के चेहरे पर हताशा और दु :ख साफ़ झलने लगा . तभी टीचर का प्रवेश हुआ..                                          सारे बच्चे शांत हो गए ..
टीचर :-  बच्चो कल रिज़ल्ट होगा.. फिर एक माह के लिए स्कूल बंद और तभी लांग बेल बज उठती है..
(क्लास रूम में हो हो करते बच्चे बाहर निकलते हैं.. )
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(दूसरा दिन प्रात: 10 : 00 बजे के आसपास का समय , बच्चे क्लास रूम में प्रवेश करते हैं. एक एक कर क्लास रूम में,  मे आय कमिन मैडम पूछ कर प्रवेश करते हैं. कुछ देर में क्लास-रूम भर जाता है  ) 
सभी बच्चे :- गुड मार्निंग मैडम .....
टीचर :-       गुड मार्निंग गुड मार्निंग गुड मार्निंग गुड मार्निंग
अनुज :-      मैम रिज़ल्ट आज ..
टीचर  :-     तुम्हारा सबसे बाद में डिक्लेयर करूंगी ..?
अनुज (बुदबुदाता है ) :- मेरा रोल नम्बर 1 है और बहुत बाद में रिजल्ट देंगीं ये माता जी...
टीचर  :-   क..क्या कहा अनुज ...
अनुज :-   कुछ नहीं मैम मैं कह रहा था “माता मंदिर में लड्डू चढ़ाने हैं”
 टीचर :-  इंतज़ार करो ..
            ( सबको रिपोर्ट कार्ड बांटने शुरू किये हर   बधाईयां, सलाह और नसीहतें देते हुए टीचर जी  बेहद खुश थीं कारण भी था कोई बच्चा 60 से कम परसेंट लेकर पास न हुआ.. था. अंत में अनुज का रिजल्ट घोषित हुआ.. 98 % लेकर भाई  क्लास में ही नहीं पूरे स्कूल में अव्वल था. शरारत और पढ़ाई के बीच एक अनोखा तादात्म्य होता है . अनुज की श्रेष्ठता को कोई भी नकार नहीं सकता पर जिस तरह अनुज नकारात्मक सोच को लेकर आगे बाद रहा है उसे देख माँ बाबा और टीचर सभी हतप्रभ हैं .
टीचर :- कल से 30 दिन का अवकाश है. कौन क्या कहना चाहता है... किसी को कुछ कहना है.. ?
 प्रगीत :- मैडम मेरे पापा का ट्रांसफर श्रीनगर में हो गया है. मुझे दिल्ली में रहना है.
श्रेया    :- आपके पापा आर्मी में हैं क्या.. ?
प्रगीत  :- हाँ ,
वैष्णवी :- देश की सच्ची  सेवा बार्डर पर तैनात लोग ही करते हैं प्रगीत ...
प्रगीत :- न, सच्ची सेवा सभी करते हैं.. मेरे पापा कहते हैं कि जैसे देश की रक्षा के लिए हम सीमा से दुश्मन का सफाया करते हैं वैसे ही देश के स्वास्थ्य की रक्षा का जिम्मा  आम सिविलियंस का है. वे  कचरे जैसे शत्रु का आसपास से सफाया करें .
स्नेहा :- अरे वाह .......... कितने सकारात्मक विचार हैं.. अंकल के ..
अनुज :- ( मैडम से ) मैम  ये सब बेकार की बातें हैं हमारा शहर तो सुधर ही नहीं सकता.. कचरा हर घर के सामने बिखरा होता है ..
टीचर :-  सही है ... पर शहर भी सुधर सकता है तब... जब कि हम दिमाग से निगेटिविटी का कचरा निकालने में सफल हों ...!
सभी बच्चे :- (अनुज को छोड़कर ) सही कहा मैडम ...
टीचर :- अनुज तुम मुझसे एग्री नहीं हो न ..
अनुज :- यस मैडम .. ओह नो मैडम .....
और फिर अचानक लांग बेल की आवाज़ सुन कर ....... बाय मैडम कह . शोर मचाते हुए बच्चे बाहर निकल जाते हैं..
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इन दिनों अधिकाँश बच्चों ने कोई न कोई समर कैम्प ज्वाइन किया था . अनुज  श्रेया पलक वैशाली, वैष्णवी, आस्था,उन्नति रिद्धि भूमि, अंजली स्नेहा 1 स्नेहा 2 मानसी  आदि ... सभी ने  बालभवन ज्वाइन किया. स्नेहा शिमला  टूर पर गई थी . तो  प्रगीत को जाना ही था. टीसी लेकर
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अनुज के घर में अनुज का कमरा कमरे में ढेरों मुखौटे कुछ पोस्टर्स बेतरतीब तरीके से लगे हुए थे . अनुज  एक चित्र बनाता है .. इस चित्र में एक व्यक्ति जिसके  सर पर  बैल की तरह सींग लगे थे .  तभी मम्मी कमरे में आतीं हैं ... अनुज क्या बना रहे हो.. ?
         अनुज :- मम्मी ये बालभवन के डायरेक्टर हैं..
          मम्मी :-   ये क्या फिर वही तुमने..( फिर  नाराज़गी भरे अंदाज़ में घूरा ..) उठो जाओ सात यहीं बज गया बालभवन जाओ..
अनुज :-  जी मम्मी
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( बालभवन में संजय सर नाटक की क्लास ले रहे थे. वैशाली की प्रहसन स्क्रिप्ट पर प्ले होना है.. आज फाइनल रिहर्सल है .. जबलपुर के मशहूर हास्य मिमिक्री कलाकर श्री के के नायकर जी ने ऐस एक  दृश्य की प्रस्तुति कर पूरे देश को हंसाया गुदगुदाया आज वैशाली की कलम से निकला प्रहसन आपको गुदगुदाएगा )     
स्थान :- जबलपुर का कोई मोहल्ला
 सुबह का  समय है मोहल्ले मे एक ही सरकारी नल है और पानी भरने वाले बहुत सारे । सब अपने घरों से दो-दो बाल्टी लेकर आते है पानी भरने के लिए और कोई भी पानी नहीं भर पाता देखिए एक तुलसी बाई आती है और अपनी बाल्टी नल के नीचे रख के चली जाती है फिर शर्मा आटीं आती है और उनकी बाल्टी हटा कर अपनी लगा देती है..
तुलसी बाई~जे का कर   दओ  शर्मा की शर्माइन  ने हमाई बालटी हटा कर अपनी बाल्टी लगा दई बुलाओ शर्माइन कों   
शर्मा आटीं~ क्या हो गया अम्मा सांस  तो ले लो जरा 
तुलसी बाई ~अरे तुम सांस कि छोड़ो पहले यह बताओ कि जे का हो रओ है 
शर्मा आटीं~ अरे अम्मा दिख नही रहा है पानी भर रहा है।
तुलसी बाई~अपने ससुर का नल समझी हो का  सबको पानी चाहने है ,पहले दो बाल्टी भर के गई अब फिर से आ गई
शर्मा आटीं~ अरे अम्मा तुम तो अकेली रहती हो हमारे घर मे तो चार लोग रहते है और अभी घर मे ननंद और उसकी बिटिया आई है तो उनको दूध  से थोड़ी ना नहवाएगे पानी तो चहिए ना 
तुलसीबाई~ हाँ  जाओ दूध से ही नेहवा दो जाओ जाओ 
शर्मा आटीं~ ठीक है अम्मा अपने घर से दूध भिजवा देना
{ दोनो लड़ती रहती है और एक छोटी सी बच्ची उनकी बाल्टी हटा कर अपनी बाल्टी लगा देती है ।}
तुलसीबाई~ अरे ए मोड़ी जे का कर रई है हट पहले मे पानी भरुंगी ।
 शर्मा आटीं~ अरे एसे कैसे पहले आप भरोगी पानी तोरे पैले से  आए है 
{फिर दोनो धक्का मुक्की करने लगते है }
तुलसीबाई~ अरे कोई शर्मा को बुलाओ बाकी लुगाई   लड़ रही है मोसे रे  शर्मा कहा मर गओ शर्मा !
 शर्मा आटीं~ पानी तो पहले मै ही भरुंगी
{ वो दोनो लड़ते रहते है और  नल का समय खत्म हो गया और सब लोग अपना अपना पानी भर के चले गए
तुलसीबाई ~ जाओ अब जाके अपनी ननद और उसकी बिटिया को दूध से ही नहवाओ जाओ [ चिड़ते हुए ] 

प्रहसन की समाप्ति होती है ......... सभी पात्रों का परिचय कराते हैं ..
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(दूसरा दिन : - 5  जून  विश्वपर्यावरण दिवस पर   बालभवन का एक दृश्य सभी बच्चे वृक्षारोपण का कार्यक्रम चल रहा है टीचर ने पर्यावरण की रक्षा के लिए वृक्षारोपण के महत्त्व की जानकारी देते हुए दो कतारें वृक्षारोपण के लिए निर्धारित की 5 -5 वृक्ष लगाने के लिए 3 – 3 बच्चों को 10 पाइंट्स पर खडा किया जाना था कुल 30 बच्चों को शामिल होना था हुए भी 30 शामिल हुए ... सभी बच्चों को 3-3 की टुकड़ी में खडा कर दिया गया  )
टीचर  :-  तो बच्चो रेडी हो न
सभी   :- यस मैडम ...
                फिर हर टुकड़ी में नियत पाइंट पर एक टुकड़ी जाती है . एक बच्चा गड्डा खोदता है दूसरा पौधा  लगाता है तीसरा वापस मिट्टी भरता है .. 9 पौधे  लग जाते हैं ..
आखिरी टुकड़ी में कुल दो बच्चे  बच्चे आगे बढ़ते हैं .. तीसरे को पुकारते हैं . अनुज अनुज जल्दी आओ . अनुज अपने काम से गायब रहता है.
  दोनों बच्चे आगे आए एक ने गड्डा खोदा दूसरे ने मिट्टी से उसे पूर दिया . ... पौधा था  लगा ही नहीं अनुज न था ....... उसके हाथ में पौधा था ... दौनो बच्चों ने अपनी अपनी ड्यूटी की थी
 अचानक हडबड़ाहट में अनुज का प्रवेश ....... हाथ में पौधा लेता है ... जब गड्डे को मिट्टी से पूरा हुआ ... फिर वो पब्लिक से पूछता है..
बताइये कहाँ लगाऊं .............?
तभी श्रेया का प्रवेश होता है.... कहा लगाओगे अनुज अब तो  मिट्टी भर दी गई है
फिर   जनता को संबोधित करते हुए श्रेया कहती है...
“समझ गए न आप सब हमारे बीच कोई न कोई एक ऐसा होता है जिसकी वज़ह से पर्यावरण असंतुलित रहता है .... आप ही बताइये पूरे विश्व में अगर ऐसा ही चलता है तो हम किस लिए पर्यावरण संरंक्षण की बात करतें हैं... ”
आइये हम सब मिल कर सही दिशा में एक सा प्रयास करें तभी पर्यावरण संरक्षित रहेगा .. सबको अनुज जैसी आदत से बचना ही होगा ............
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 अनुज का घर रात के कोई दस बजे हैं.. अनुज बहुत से पोस्टर बना चुका है. एक अंतिम पोस्टर बनाते बनाते रात 11 :30 बज गए हैं.. पोस्टर बनाकर अनुज ने चेहरे पर खबीस जैसे दांत उगा दिए .. और हँसने लगा पोस्टर पर उसने किसी का नाम लिखा .. पोस्टर इज़ल पर लगाकर टकटकी लगा देख रहा था कि उसे नींद आ गई..
अनुज स्वप्न में चला जाता है...
सपने का दृश्य
तभी उसके कमरे में कोई व्यक्ति प्रवेश करता है ...
व्यक्ति :- अनुज मेरा नाम दीपक शर्मा है.. तुम्हारे पापा का दोस्त ...
अनुज :- जी, अंकल ... बताइये ... कैसे आना हुआ..,
दीपक शर्मा :- बस यूं ही.. पापा बता रहे थे कि तुम बेहतरीन पेंटिंग करते हो ..
अनुज         :- (ज़रा एटीटयूट प्रदर्शित करते हुए )... यस अंकल कोशिश कर रहा हूँ..
दीपक शर्मा :-  दिखाओ दिखाओ...
अनुज  एक एक करके दीपक को पोस्टर दिखाता है हर पोस्टर में एक न एक पशु या विचित्र प्राणी देखकर दीपक को अजीब लगता है..
दीपक शर्मा :- लेकिन इंसानों को तुम जानवर या राक्षस क्यों बनाते हो ..?
अनुज :-         अंकल सिंपल सी बात है..  मुझे उनमें  जो नज़र आता है वो ज़रूर बना देता हूँ..
दीपक शर्मा :-  अगर ये सजीव हो जाएं तो ..?
अनुज :-           सजीव यानी ज़िंदा हो जाएं अर्रे वाह अंकल .... मज़ा आ जाएगा ...
              इतना सुनते व्यक्ति गायब हो जाता है... अनुज उसके गायब हो जाने के बाद असहज सा हो जाता है.. कमरे की लाईट गुल हो जाती है.. और लाईट आते ही अनुज देखता है.. बहुत से जानवर उसे घेरे हुए खड़े हैं..
अनुज उनसे दर कर भागता है.. सारे जानवर राक्षस उसका पीछा करतें हैं .. वो डरा हुआ भागता है.. अचानक बिस्तर पर निढाल हो गिर जाता है .
दरवाज़े पे खटखटाने की आवाज़ सुन उसकी नींद खुलती है. मां की आवाज़ सुन वो दरवाजा खोलता है .. माँ उसे चाय देती है ...
अनुज माँ से लिपट जाता है.. और कहता है .. माँ आज एक आपका पोट्रेट बनाऊं ..?
माँ :- नहीं मुझे भी तू सींग लगा देगा..
अनुज :- न माँ अब मैं सबके वैसे ही  पोट्रेट बनाऊंगा .. जैसा उनको ईश्वर ने बनाया है...     
    

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