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जनवरी, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शौर्या-शक्ति आत्मरक्षा प्रशिक्षण : दिख रहा असर

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संभागीय बाल भवन जबलपुर द्वारा निर्भया  दिवस  दिनांक  16 दिसंबर 2014 से प्रारम्भ  मार्शल आर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन   31   दिसंबर   2014   को बाल भवन परिसर में श्रीमती प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव ,   आईपीएस ,   आईजी-महिला सेल , जबलपुर के मुख्यआतिथ्य में सम्पन्न हुआ था तब अपने उदबोधन में श्रीमती प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव ने बच्चों की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि जो बच्चों ने मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं वो किसी भी स्थिति में जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है  खासकर तब और आवश्यक है जब कि सामाजिक परिस्थितियाँ सामान्य नहीं हैं ।किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि किसी अन्य व्यक्ति खासकर बालिकाओं ,     बच्चों   ,   महिलाओं   ,   के विरुद्ध हिंसक हो । बच्चे देश का  भविष्य हैं हमारी कोशिशें ये होनी चाहिए कि हम खुद बेहतर तरीके से जिएं  और समूचे समाज को सुख से जीनें दें । बाल भवन के इस प्रयास से मैं बेहद उत्साहित हूँ । मेरा सुझाव है कि प्रशिक्षण निरंतर जारी रहे इस हेतु जो भी सहयोग अपेक्षित हो उसके लिए सदैव तत्पर हूँ ।    बालभवन जबलपुर ने उनकी सलाह मानते हुए प्रशिक्षण कार्य

बालिकाओं ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया

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       राष्ट्रीय बालिका दिवस के अंतर्गत  संभागीय बालभवन जबलपुर में आयोजित कंठ संगीत प्रतियोगिता में  बालिकाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. सर्वाधिक कठिन प्रतियोगिता सब जूनियर ग्रुप आयुवर्ग 06 से 14 वर्ष  में रही जिसमें प्रथम स्थान अर्जित किया – बेबी इशिता तिवारी ने. द्वितीय शाम्भवी पंडया एवं बेबी समिष्ठा दास गुप्ता, तथा तृतीय स्थान पर कु. प्रज्ञा साहू रहीं जबकि विशेष स्थान  कु. इशिता नामदेव एवं बेबी पायल श्रीवास को प्राप्त हुआ.         जूनियर 14 से 18 आयुवर्ग में प्रथम स्थान कु. उन्नति तिवारी , द्वितीय शिफाली सुहाने, तृतीय सना परवीन रहीं . साथ ही विशेष स्थान पर कु. वैशाली बरसैंया रहीं .         सीनियर आयुवर्ग में कु. परिक्षा राजपूत प्रथम, साक्षी गुप्ता द्वितीय तथा कुमारी प्रिया सौंधिया तृतीय स्थान पर रहीं . जबकि विशेष स्थान पर कु. रंजना निषाद एवं कु मनीषा तिवारी रहीं .    कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री मनीष शर्मा जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्री अखिलेश मिश्र,पुनीत मारवाह,  सहायक संचालक  सुश्री माधुरी रजक, परियोजना अधिकारी  श्रीमती संजना चौकसे, श्री जी एस लौवंशी, संज

Boby : Story of lonely girl

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Boby : story of lonely girl on youtube

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Balbhavan  Jabalpur Presents Hindi Short Play Boby : Story of lonely girl Written by : Shri Vijay Tendulakar Direction : Sanjay Garg Music :- Miss Shipra Sullere Lyrics – Girish Billore (Fudak Chiraiya) Producer :- Girish Billore Assistant Director Balbhavan Women Empowerment W& CD   Jabalpur 1. Artist :- Boby – Baby Shreya Khandelwal Micky – Samriddhi Asathi Bird Gouraiya – Baby Palak Gupta Moon – Mini Dayal, Mother- Sana Parveen Father-  Manasi Soni Akabar – Shiva Namdev Birbal –Ashutosh Rajak Shivaji - Sagar Soni   Fairies – Riddhi Shukla, Vaishali Barsainya, Aastha                         Agrahari, Dipali Thakur, Aakriti Vaishy, Shaifali                       Suhane, 2. Dress   :- Sanjay Pateriya 3. Sound :- Miss Mahima Piparsaniyan 4. Light   :- Manisha Tiwari 5. Assistance  Music- Somnath Soni, Muskan Soni ,  Suryabhan Singh Thakur,  Dance :- Indra Pande & Mahima Piparsaniyan 6. Special Support  :- Mr. Anjani Vishvakarma, Studio Music Zone, Jab

PHOTO : STORY OF INNOCENT LONELY BABY

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                                              मशहूर नाटक लेखक स्व. विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित कथानक पर आधारित बाल-नाटक "बॉबी" का निर्माण    संभागीय बालभवन जबलपुर द्वारा श्री संजय गर्ग के निर्देशन में तैयार कराया गया है. जिसकी दो प्रस्तुतियां भोपाल में दिसंबर माह में तथा जबलपुर में 2  प्रस्तुतियां की जा चुकीं है.                     बॉबी  नौकरी पेशा माता पिता की इकलौती बेटी है जिसे स्कूल से लौटकर आम बच्चों की तरह माँ की घर से अनुपस्थिति बेहद कष्ट पहुंचाने वाली महसूस होती है. उसे टीवी खेल पढने लिखने से अरुचि हो जाती है. स्कूली किताबों के पात्र शिवाजी , अकबर बीरबल , आदि से    उसे  घृणा होती है.    इतिहास के के इन पात्रों की कालावधि याद करना उसे बेहद उबाऊ कार्य लगता है. साथ ही बाल सुलभ रुचिकर पात्र मिकी माउस , परियां गौरैया से उसे आम बच्चों की तरह स्नेह होता है. और वह एक फैंटेसी में विचरण करती है.    शिवाजी , अकबर बीरबल ,   से वह संवाद करती हुई वह उनको वर्त्तमान परिस्थियों की शिक्षा देती है तो परियों गौरैया मिकी आदि के साथ खेलती है. अपनी पीढा शेयर करती है...              

सूर्य उपासना का पर्व है मकर संक्रांति -सरफ़राज़ ख़ान

भारत में समय-समय पर अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं. इसलिए भारत को त्योहारों का देश कहना गलत न होगा. कई त्योहारों का संबंध ऋतुओं से भी है. ऐसा ही एक पर्व है . मकर संक्रान्ति. मकर संक्रान्ति पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब इस त्यौहार को मनाया जाता है. दरअसल, सूर्य की एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को संक्रांति कहते हैं. सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है. यह इकलौता ऐसा त्यौहार है, जो हर साल एक ही तारीख़ पर आता है. दरअसल यह सौर्य कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है. इस साल 28 साल के बाद मकर संक्रांति पर महायोग बन रहा है. 14 जनवरी को दोपहर 1.51 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा और सूर्य उत्तरायण हो जाएगा. मकर संक्रान्ति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति शुरू हो जाती है. इसलिये इसको उत्तरायणी भी कहते हैं. तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाया जाता है. हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लोग शाम होते ही आग जलाकर अग्नि की पूजा करते ह

Story of Village Girl By Shri Suresh Tomar

BALBHAVAN KI OR

Ammaa Hindi Story ByAnurag Trivedi

बॉबी नाटक : छोटे परिवारों की बड़ी समस्या का सजीव चित्रण

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                                             मशहूर नाटक लेखक स्व. विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित कथानक पर आधारित बाल-नाटक "बॉबी" का निर्माण  संभागीय बालभवन जबलपुर द्वारा श्री संजय गर्ग के निर्देशन में तैयार कराया गया है. जिसकी दो प्रस्तुतियां भोपाल में दिसंबर माह में की जा चुकीं है.                   बॉबी  नौकरी पेशा माता पिता की इकलौती बेटी है जिसे स्कूल से लौटकर आम बच्चों की तरह माँ की घर से अनुपस्थिति बेहद कष्ट पहुंचाने वाली महसूस होती है. उसे टीवी खेल पढने लिखने से अरुचि हो जाती है. स्कूली किताबों के पात्र शिवाजी, अकबर बीरबल, आदि से  उसे  घृणा होती है.   इतिहास के के इन पात्रों की कालावधि याद करना उसे बेहद उबाऊ कार्य लगता है. साथ ही बाल सुलभ रुचिकर पात्र मिकी माउस, परियां गौरैया से उसे आम बच्चों की तरह स्नेह होता है. और वह एक फैंटेसी में विचरण करती है.  शिवाजी, अकबर बीरबल,  से वह संवाद करती हुई वह उनको वर्त्तमान परिस्थियों की शिक्षा देती है तो परियों गौरैया मिकी आदि के साथ खेलती है. अपनी पीढा शेयर करती है... कि उसे माँ और पिता के बिना एकाकी पन कितना पीढ़ा दायक लगता है.    

सातवां राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस आयोजन हेतु विविध प्रतियोगिताऍ एवं कार्यक्रम

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            भारत निर्वाचन आयोग की पहल पर तथा राज्‍य निर्वाचन आयोग के समन्‍वय से 2011 से आयोजित राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस का सातवां आयोजन आगामी 25 जनवरी , 2017 को भारत निर्वाचन आयोग के स्‍थापना दिवस पर होगा।           वर्ष 2017 राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस की मुख्‍य थीम '' युवा एवं भावी मतदाताओं का सशक्तिकरण है। इस अवसर पर जबलपुर के समस्‍त शासकीय एवं अशासकीय , एम.पी.बोर्ड , सी.बी.एस.ई. , आय.सी.एस.ई. हेतु विविध प्रतियोगिताऍ आयेाजित है। निबंध लेखन - (किसी एक विषय पर) 1.    मजबूत लोकतंत्र में युवा एवं भावी मतदाताअें की भूमिका। 2.    नैतिक मतदान में भावी मतदाताओं की भूमिका। 3.    लोकतंत्र में महिलाअें तथा युवाओं का स‍शक्तिकरण । स्‍लोगन लेखन (किसी भी एक विषय पर) 1.    भावी मतदाता एवं सूचना प्रौ़द्योगिक का उपयोग। 2.    सुव्‍यवस्थ्ति मतदाता शिक्षा। 3.    निर्वाचक सहभागिता का चुनावी प्रबंधक में प्रयोग। 4.    नैतिक मतदान में भावी मतदाता की भूमिका। चित्रकला प्रतियोगिता (किसी भी एक विषय पर) 1.    ई.व्‍ही.एम. मशीन तथा बी.वी.पी.ए.टी. 2.    आदर्श मतदान केन्‍द्

“बेटी पढाओ : बेटी बचाओ” का सूत्रपात किया था सावित्री बाई फुले ने : संजय गर्ग

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3 जनवरी 1831 को आज से 186 साल पहले महिला शिक्षा के लिए बालिका स्कूल खोलने वाली महिला  सावित्री बाई फुले का जन्म श्री खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी देवी के घर हुआ था. ये वो दौर था जब बेटियों और महिलाओं को शिक्षा दीक्षा से दूर रखा जाता था . सावित्री बाई फुले ने उसी दौर में समाज के घोर निराशाजनक व्यवहार के बीच 1848 में बालिकाओं के लिए  स्कूल खोल कर “बेटी पढाओ : बेटी बचाओ” का सूत्रपात किया था !” -                     तदाशय के विचार बाबी नाटक के निर्देशक एवं रंगकर्मी श्री संजय गर्ग ने    बालभवन में आयोजित बालसभा में किया. आज की विशेष बालसभा स्व. सावित्री बाई फुले के जीवन पर केन्द्रित थी. बालसभा के प्रारम्भ में बाल-अभिनेत्री श्रेया खंडेलवाल ने स्व. सावित्री जी की जीवनी प्रस्तुत की. तदुपरांत बच्चों से उनके जीवन पर आधारित प्रश्नोत्तरी का सिलसिला देर तक चला .  इस अवसर पर अतिथि  रंगकर्मी  श्री दविंदर सिंह ने बालभवन द्वारा बालसभाओं के आयोजन को आज के समय के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण निरूपित करते हुए कहा-“बाल सभाओं के ज़रिये विषयों को समझाने और समझाने के प्रक्रिया बच्चों को सृजनशील बन

सावित्रीबाई फुले : जन्म दिवस

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                                   सावित्रीबाई फुले   (3  जनवरी  1831 – 10  मार्च  1897)                  भारत   की एक समाज सुधारिका एवं   मराठी   कवयित्री   थीं । उन्होंने अपने पति   ज्योतिराव गोविंदराव फुले   के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकारों एवं शिक्षा के लिए बहुत से कार्य किए। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने   अछूत   बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की ।  सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था । सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयास