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दिसंबर, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अब के नव प्रभात में भोर की उजास में ...

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अब के नव प्रभात में भोर की उजास में ... हम लगें रहें सदा शांति के प्रयास में .....! शांति पथ वास्ते ,गीत होने चाहिए  प्रभावयुक्त गीत को सुर का साथ चाहिए । गूँजते रहें ये गीत , हम हों इस प्रयास में .॥ क्रोध और कुंठा के कारणों को मत सींचो शांति के पथिकों के पाँव आप मत खींचो प्रेम नींव विश्व की , मत जियो कयास में ॥ 

श्रीमती प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव ने , निर्भया ब्रिगेड की कमान कुमारी सृष्टि गुप्ता ,वीर नारायण ब्रिगेड की कमान मास्टर व्योम गर्ग को सौंपी

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               संभागीय बाल भवन जबलपुर द्वारा निर्भया  दिवस  दिनांक  16 दिसंबर 2014 से प्रारम्भ  मार्शल आर्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन   31 दिसंबर 2014 को बाल भवन परिसर में श्रीमती प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव , आईपीएस , आईजी-महिला सेल , जबलपुर के मुख्यआतिथ्य में सम्पन्न । प्रशिक्षक नरेन्द्र गुप्ता  एवं सपन धर गुप्ता को शाल-श्रीफल से श्रीमती प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव , आईपीएस , आईजी-महिला सेल , जबलपुर द्वारा सम्मानित किया गया  ।           अपने उद्बोधन में श्रीमती प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव ने बच्चों की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि जो बच्चों ने मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं वो किसी भी स्थिति में जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है  खासकर तब और आवश्यक है जब कि सामाजिक परिस्थितियाँ सामान्य नहीं हैं । किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि किसी अन्य व्यक्ति खासकर बालिकाओं ,  बच्चों , महिलाओं , के विरुद्ध हिंसक हो । बच्चे देश का  भविष्य हैं हमारी कोशिशें ये होनी चाहिए कि हम खुद बेहतर तरीके से जिएं  और समूचे समाज को सुख से जीनें दें । बाल भवन के इस प्रयास से मैं बेहद उत्साहित हूँ । म

वक्त का प्रवाह रोक वक्त ही उधार लें

आओ मीत लौट चलें  गीत को संवारने अर्चना का वक्त है आ बतिया सुधार लें कुछ अगर जो शेष है ,शेष जो विशेष है  वक्त का प्रवाह रोक वक्त ही उधार लें।   उधार लिए वक्त से ज़िंदगी सुधार लें और  भूले बिसरों को आज हम पुकार लें पंच  फैसले हमारी आदिम परिभाषा है तरु तट चौपाल की पत्तियां बुहार दें।

संभागीय बाल भवन जबलपुर क्रिसमस कार्यशाला का सम्पन्न

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जवाहर बाल भवन भोपाल द्वारा निर्धारित वार्षिक कैलेंडर 2014 के परिपालन में  संभागीय बाल भवन जबलपुर में पूरे माह “क्रिसमस कार्यशाला” का आयोजन किया गया यह कार्यशाला दिनांक 1 दिसंबर 2014 से 24 दिसंबर 2014 तक की अवधि तक जारी रही । कार्यशाला के दौरान संगीत विभाग के अनुदेशकों  द्वारा ऐंजिल्स द्वारा गाए जाने वाले कोरल के गायन की तकनीकी , से संगीत के छात्र- छात्राओं को बताई गई तथा कोरल एवं शांति सेवा पर आधारित गीतों की कम्पोजिंग कराई गई एवं उसके गाने का अभ्यास कराया गया ।             कला एवं क्राफ्ट विभाग की अनुदेशिका द्वारा प्रभू ईशु के जन्म के समय के दृश्य का निर्माण पेंटिंग एवं आर्ट क्राफ्ट के जरिये तैयार कराया गया ।                      कार्यशाला का समापन दिनांक 24 दिसंबर 2014 को फादर रिजवी के मुख्य आतिथ्य में विशिष्ट अतिथि श्री मनीष शर्मा , सहायक संचालक  एवं श्रीमती ज्योति उपाध्याय परियोजना अधिकारी उपस्थिति में हुआ । संभागीय बाल भवन के सेन्टा क्लाज़  बच्चों द्वारा एक ओर  अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेंट किये गये साथ ही साथ बच्चों पर टाफ़ियाँ बरसा कर आयोजन को कौतूहल पूर्ण बना दिया ।

बालभवन कप वालीबाल टूर्नामेंट 2014

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कार्यालय संचालक , सम्भागीय बाल भवन जबलपुर म. प्र. बालभवन कप वालीबाल टूर्नामेंट 2014  दिनांक :- 02.01.2015 से 03 .01.2015 बेस्ट आफ फाइव प्रणाली                            ग्रुप ए मैच बाल भवन सीनियर एकादश विरुद्ध डी. एन. जैन स्कूल जबलपुर                       ग्रुप बी मैच                                             बाल भवन जूनियर एकादश       विरुद्ध   साई एकादश ,   जबलपुर    फाइनल    दिनांक 03.01.2015 ग्रुप ए  विजेता विरुद्ध ग्रुप बी

पेशावर त्रासदी पर बनाई पेंटिंग देख भावुक हुए माननीय मुख्यमंत्री

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माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज चौहान को   श्रीमती रेणु पांडे बाल भवन के बच्चों की बनाई पेंटिंग की के बारे में  जानकारी देते हुए  संभागीय बालभवन जबलपुर के बच्चे  पाकिस्तान  के पेशावर में 16 दिसंबर 2014 को स्कूली बच्चों पर हुए आतंकी हमले से बेहद दु:खी थे । सामूहिक प्रार्थना के उपरांत बच्चों ने विश्व में आतंक के खात्मे पर खुला के बातचीत की । सभी बच्चों  के मन में आक्रोश था ।  सभी दु:खी थे कुछ बच्चे भावुक भी थे आंखों में नमी लिए हमसे पूछा – “आतंक का अंत क्या है ? ”       बच्चों को हमने बताया कि जितना अधिक से अधिक सकारात्मकता एवं तेजी से  को बढ़ावा दिया जाएगा उतना तीव्रता से आतंक का अंत होगा । हम एक महान देश के नागरिक हैं हमें विश्व को शांति का संदेश देते रहना होगा । अगर हम कलाकार हैं तो कला के जरिये , कवि हैं तो हमारी कविताएं  सकारात्मक होनी चाहिए । सबसे पहले हम मन से कुंठा निकालें और विश्व को शांति का संदेश देने की कोशिश करें चित्रों से गीतों से कविताओं से साहित्य से ......... !! पेंटिंग पर हस्ताक्षर करते हुए मान मुख्यमंत्री जी     बस फिर क्या था किसी  ने कलम उठाई

मुख्यमंत्री को भेंट की गई बाल भवन, जबलपुर के बच्चों द्वारा बनाई पेंटिंग शक्तिरूपा

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जबलपुर   में   आयोजित   इन्द्रधनुष   कार्यक्रम   में   मुख्यमंत्री   श्री   शिवराज   सिंह   चौहान   को   बाल कलाकारों    द्वारा   बनाई   गई    पेंटिंग  “ शक्तिरूपा ”   भेंट    की    गई ।   दैनिक भास्कर  नई दुनिया    यह पेंटिंग  संभागीय बाल भवन जबलपुर के बाल कलाकारों  तान्या बड़कुल, रेशम ठाकुर, शुभमराज अहिरवार एवं रिंकी राय द्वारा कला निर्देशिका  श्रीमती रेणु पाण्डे  के  मार्गदर्शन  में एक माह पूर्व  तैयार की गई   ।   नारी  को  “शक्तिरूपा”  के  रूप में  प्रदर्शित किया गया है ।  स्वास्थ्य राज्य मंत्री शरद जैन, महापौर प्रभात साहू, सांसद राकेश सिंह, विधायक अंचल सोनकर, श्रीमती प्रतिभा सिंह,  श्रीमती नंदिनी मरावी,अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी इंदू, पूर्व मंत्री अजय विश्नाई, पूर्व मंत्री श्री हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू,मनोनीत विधायक श्रीमती लारेन बी. लोबो,  जबलपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा, श्री विनोद गोंटिया, डॉ. विनोद मिश्रा, श्री आशीष दुबे,   सोनू बचवानी,  संभागायुक्त श्री  दीपक खाण्डेकर , पुलिस महानिरीक्षक डी. श्रीनिवास राव,आई जी श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव,

बालभवन जबलपुर पंद्रह दिवसीय व्यक्तित्व विकास कार्यशाला

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बच्चों में रचनात्मक विधाओं  के विकास के साथ साथ उनके व्यक्तित्व में  निखार लाने के उद्देश्य से संभागीय बालभवन जबलपुर  द्वारा   “ पंद्रह दिवसीय व्यक्तित्व विकास कार्यशाला   ” आयोजन दिनाँक 25.11.14     से   10.12.   2014     तक किया गया । जिसमें 45  बच्चों ने भाग लिया , जिसमें  नेत्रहीन बालिकाएँ का शामिल होना एक उल्लेखनीय बिन्दु रहा ।                   कार्यशाला की विषय विशेषज्ञ   सुश्री नीतू पाँडे , एम.एस-सी. , एम सी ए , कराते ( ब्लैक-बैल्ट )   कार्यशाला एक्सपर्ट  सुश्री नीतू पाँडे ने  कार्यशाला में शामिल बच्चों को उनके व्यक्तित्व विकास के लिए एक विशेष प्रविधि एवं तकनीकी का सहारा लिया जिसमें  “करके दिखाओ : सिखाओ” . कार्यशाला , संप्रेषणीयता बातचीत , साक्षात्कार , संवाद , टेबल-मैनर्स , व्यक्तिगत दैनिक समय सारणी आदि मुद्दों पर विशेषरूप से केन्द्रित रही ।  “संपादक दैनिक नवभारत ने लिया कार्यशाला का जायजा”              दिनाँक   26.11.14   को  बालभवन पहुँचे वरिष्ठ पत्रकार एवम नवभारत जबलपुर के सँपादक श्री चैतन्य भट्ट ने व्यक्तित्व विकास कार्यशाला में  पहुँचकर प्रशिक्

“Be a part of Bal Bhavan team”

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                         // कला जीवनस्य सौंदर्यम // “Be a part of Bal Bhavan team” Respected Madam / Sir ……………… Bal Bhavan a creativity resource centre for children, in the age group of 5 – 16 years,  and here they pursue a myriad of activities like Creative Art, Creative Performance, Science Activities, Photography, Literary Activities, Integrated Activities (including traditional folk arts), Physical education (Indoor & Outdoor Games), Museum Techniques, Home Management etc. It also runs a training centre for teachers & teacher trainees. We are looking out for people who hold welfare of children and their overall development close to their heart and wish to render voluntary service for this noble cause and contribute in reaching out with Bal Bhavan activities to a larger section of society. If you are such a person and willing to be a part of Bal Bhavan team, you are invited to apply for the same in the attached form and e-mail to :- balbhavanjbp@

निर्भया दिवस :- दिनांक 16.12 .2014 से बालिकाओं के लिए भारतीय मार्शल आर्ट kalaripayattu कलरीपयटट कार्यशाला

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राज्य   केरल   से व्युत्पन्न भारत की एक युद्ध कला है। संभवतः सबसे पुरानी अस्तित्ववान युद्ध पद्धतियों में से एक , ये   केरल   में और   तमिलनाडु   व   कर्नाटक   से सटे भागों में साथ ही पूर्वोत्तर   श्रीलंका   और   मलेशिया   के मलयाली समुदाय के बीच प्रचलित है। इसका अभ्यास मुख्य रूप से केरल की योद्धा जातियों जैसे नायर , एझावा द्वारा , किया जाता था             कलरीयपट्टू     में हमले , पैर से मारना , मल्लयुद्ध , पूर्व निर्धारित तरीके , हथियारों के जखीरें और उपचार के तरीके शामिल हैं।   इसके क्षेत्रीय स्वरुप   केरल   की भौगोलिक स्थिति के अनुसार वर्गीकृत हैं , ये हैं मलयालियो की उत्तरी शैली , तमिलों की दक्षिणी शैली और भीतरी केरल से केन्द्रीय शैली. उत्तरी कलारी पयट कठिन तकनीक के सिद्धांत पर आधारित है , जबकि दक्षिणी शैली मुख्यतः नर्म तकनीकों का अनुसरण करती है , हालांकि दोनों प्रणालियां आंतरिक और बाह्य अवधारणाओं का उपयोग करतीं हैं।             कलारी पयट के कुछ युद्ध अभ्यासों को नृत्य   में उपयोग किया जा सकता है और वो   कथकली   नर्तक जो युद्ध कला को जानते थे , वे स्पष्ट रूप से अन्य दूसरे

हमको मन की शक्ति देना..........

Post by Khushi . हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें ।  दूसरों की जय से पहले, खुद की जय करें ।  हमको मन की शक्ति देना ॥  भेदभाव अपने दिल से, साफ कर सकें ।  दूसरों से भूल हो तो, माफ कर सकें । झूठ से बचे रहें, सचका दम भरें ।  दूसरों की जयसे पहले, मुश्किलें पडें तो हम पे, इतना कर्म कर । साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर । खुद पे हौसला रहे, सच का दम भरें ।  दूसरों की जय से पहले, खुद की जय करें । यूट्यूब पर सुनने के लिये इस पंक्ति को क्लिक कीजिये हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें  ।