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अगस्त, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जनजागरण के लिए आगे आया संभागीय बालभवन जबलपुर

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*बालभवन जबलपुर की बाल प्रतिभाओं पॉक्सो के प्रचार प्रसार हेतु खुद साबित किया* पुलिस कन्ट्रोल रूम जबलपुर में श्रीमति सुप्रिया सिंह के मुख्य आतिथ्य एवं श्रीमति प्रज्ञा सिंह की अध्यक्षता तथा श्रीमति शुभश्री के विशिष्ट आतिथ्य में *पुलिस परिवार की महिलाओं एवं बच्चो के साथ बाल यौन शोषण के विरूद्ध जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया*. जिसमे पुलिस परिवार के 18 वर्ष से कम आयु की बालिका तथा महिलायें बड़ी संख्या मे उपस्थित हुई. पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय मे पदस्थ सहायक महानिरीक्षक सुश्री अंजूलता पटले ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुये बताया कि अधिकतर यौन शोषण हमारे बीच के पारिवारिक सदस्यों, अति घनिष्ट व्यक्तियों, परिचितों, पड़ोसियों द्वारा किया जाता है. हमें एैसे लोगों से सर्तक एवं सवाधान रहना है व अपनी बातों को अपने निकटतम परिजन को बताय ेंताकि बाल यौन शोषण के विरूद्ध समाज की मानसिकता को हम सब मिलकर बदल सके. महिला बाल विकास के अधिकारी अखिलेश मिश्रा एवं मनीष त्रिपाठी द्वारा लाडो अभियान एवं सामेकित बाल संरक्षण योजना के बारे मे विस्तृत जानकारी दी गयी. बच्चों को कोमल एंव सत्यमेव जयते फिल्म का

समय से आगे का चिंतक महात्मा अटल

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आज स्तब्ध हो जाना लाज़िमी है जिसकी अवधारणा थी कि डेमोक्रेटिक सिस्टम में हिंसा और वैमनस्यता का कोई स्थान न नहीं । एक कवि के अतिरिक्त शायद ही कोई इतना नरम रुख रखता हो एक सियासी होने के बावज़ूद ।  हिंसा के विरुद्ध एक समरस वातावरण निर्माण की कोशिश को ये देश याद रखेगा । अटल बिहारी वाजपेयी जी के जबलपुर आगमन पर हम युवा पीढ़ी के लोग अक्सर उस सभा में ज़रूर जाते थे । मैं तो उनकी मानवीय संवेदनाओं पर आधारित जीवन क्रम का प्रभाव देखना चाहता था । उनके वक्तव्यों में समकालीन परिस्थितियों के लिए सामाजिक सहिष्णुता के लिए जो भी कंटेंट्स होते थे सृजन के विद्यार्थी के रूप में मेरे अनंत तक उतरती थी । वक्तता के रूप में अपनी ओर सम्मोहित करने के मुद्दे पर विश्व के महान वक्ताओं में श्रीमती इंदिरा जी , ओपराह विनफ्रे मार्टिन लूथर किंग, के ऊपर रखता हूँ । क्योंकि वे जो कहते थे उसे जीते भी थे उनकी जिव्हा से निकली ध्वनि कोरे शब्द न थे उनमें सत्यबोधित हो जाने के सहज गुण मैने ही नहीं सभी ने महसूस किए ही होंगे । उनको सियासी नज़रिये से न देख पाऊंगा क्योंकि उनकी छवि अधिसंख्यक भारतीयों में साहित्यकारों की थी । उनकी

खुद से अधिक राष्ट्र के लिए सोचना चाहिए

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संभागीय बालभवन जबलपुर में प्रात: 08:00 बजे संचालक बालभवन द्वारा ध्वजारोहण किया । तदुपरांत याशिका तिवारी,प्रत्युषा तिवारी,शिवानी नामदेव,अनुश्री तिवारी,जानवी सोनी,अन्वेषा गुप्ता,आरना दुबे,दिव्यांशी अग्रवाल आदि ने राष्ट्रीय एवम भावात्मक गीतों की प्रस्तुति दी ।  इस अवसर पर संचालक बालभवन गिरीश बिल्लोरे ने बच्चों से बात करते हुए कहा कि देश के विकास के लिए सबके महत्व को समझना चाहिए । दूसरों को कमज़ोर बना के किसी का विकास नहीं होता देश का भी नहीं । खुद से अधिक राष्ट्र के लिए सोचना और कार्य करना चाहिए । अब बालभवन का अर्थ सभी बच्चे और अभिभावकों से छिपा नहीं है । इसके लिए सभी गुरुजन की मेहनत है कि बालभवन जबलपुर में जाना और पहचाना जा रहा है बच्चों, अभिभावकों, को धन्यवाद देते हुए अनुदेशकों क्रमशः: श्रीमती रेणु पांडे, डॉ शिप्रा सुल्लेरे, श्री देवेन्द्र यादव एवम श्री सोमनाथ सोनी की क्षमता की सराहना की । इस अवसर पर संचालक ने बताया कि बच्चों के लिए 7000=00 रुपये की खेल सामग्री प्रदान कर श्री सुशील शुक्ला अध्यक्ष बालभवन सहयोगिनी एवम सलाहकार समिति ने देकर जो कार्य किया है वो अनुकरणीय है । ना

स्वतंत्रता दिवस 2018 के अवसर पर बच्चों के नाम संदेश

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प्रिय  बच्चो            वंदेमातरम अगस्त क्रांति सरदार उधम सिंह खुदीराम बोस की शहादत के दिनों की याद दिलाता है बच्चो 200 से अधिक साल गुलाम भारत ने आज़ादी की सावनी फुहारों में जश्न मनाया था । इस आज़ादी की कीमत त्याग, तपस्या, कुर्बानी, थी आज़ादी के आंदोलन में विश्व को भारत की सहिष्णुता एवम अहिंसा का परिचय भी मिला । जो इस आज़ादी को जाति धर्म वर्ग, वर्ण, क्षेत्र , भाषा के आधार पर बांटकर देखना चाहते हैं वे भारतीय होकर भी भारतीय नहीं लगते । बालभवन एक प्रयोगशाला है जहां सबके साथ एकता का पाठ में भी आपके साथ पढ़ रहा हूँ । सबके बच्चों और उनके गुरुजन मेरे लिए मुझसे अधिक आवश्यक एवम श्रेष्ठ हैं । आदरणीय गुरुजनों को नमन करता हूँ । मुझे यकीन है कि इस बार हम दो से भी अधिक बालश्री एवार्ड जीतेंगे । पूरे राष्ट्र में यह आंकड़ा 2 से 4 या अधिक हो जाता है तो जबलपुर एवम विभाग के लिये गौरव होना लाज़िमी है । यहां गुरुजनों श्रीमती रेणु जी, डॉ शिप्रा, श्री देवेन्द्र यादव, एवम श्री सोमनाथ सोनी की श्रेष्ठता बेजोड़ एवम अद्वितीय है । इन प्रतिभा वान गुरु जनों को मेरा नमन बच्चो , बालभवन जबलपुर को स्मार्ट ब

भारतरक्षा पर्व : कलेक्टर तथा व एसपी ने भी सैनिकों के लिए लिखे सन्देश

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         स्लम की प्रतिभा  मास्टर तरुण अहिरवार  ने आखिर अपने सैनिक के साथ डीएम साहिबा  का फोटो करवा ही लिया .     जागरण पत्र समूह द्वारा 6 वर्षों से चलाई जा रही है एक मुहिम जिसे  भारत रक्षापर्व    के नाम से जाना जाता है. 02 अगस्त 2018 को जबलपुर से सैनिकों के लिए शहर भर के शैक्षिक संस्थानों स्वयम सेवी संगठनों से रक्षा-सूत्र एकत्र करते हुए रक्षा पर्व रथ को संभागीय बालभवन जबलपुर से भोपाल के लिए  कलेक्टर छवि भारद्वाज व एसपी अमित सिंह ने रथ को हरी झंडी दिखाकर भोपाल के लिए रवाना किया गया । समापन संभागीय बाल भवन में किया गया। जहां कलेक्टर छवि भारद्वाज व एसपी अमित सिंह ने रथ को हरी झंडी दिखाकर भोपाल के लिए रवाना किया। बाल भवन में हुए समापन समारोह में नईदुनिया परिवार से यूनिट हैड गुरुदयाल सिंह , संपादक अनूप शाह के साथ संभागीय बाल भवन के संचालक गिरीश बिल्लौरे उपस्थित रहे । बाल भवन के बच्चों ने देशभक्ति गीतों से सजी प्रस्तुतियां डॉ.शिप्रा सुल्लेरे के निर्देशन में दी ।   डॉ. रेणु पांडे के निर्देशन में बच्चों ने राखियां और कार्ड बनाकर सीमा पर तैनात सैनिक भाइयों के लिए

बम फोड़ने वाला डिसीप्लीन इंचार्ज सागर सोनी

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कोई ऐसा न होगा जिसने बचपन में कोई शरारत न की हो . अगर कोई बच्चे से शरारत का एकाधिकार छीनता है तो मुझे कोफ़्त अवश्य होती है.मेरी नज़र में शरारत पर बच्चों का एकाधिकार होना चाहिए चाहिए क्या होता ही है. पर उन गार्जियंस एवं अभिभावकों से असहमत हूँ जो तानाशाह की तरह बच्चे के इस नैसर्गिक अधिकार यानी शरारत के अधिकार को छीनते हुए अपने विचार थोंपते हैं. ऐसे अभिभावकों एवं शिक्षकों को जान लेना चाहिये कि सबसे अधिक शरारत करने वाले बच्चे सबसे अधिक क्रिएटिव होते हैं. इसके दो उदाहरण मैंने 2014 से बालभवन में आने के बाद देखे . एक है अक्षय ठाकुर शरारत का बफर स्टाक था ये बालक जब सुना था कि भाई को बालभवन के नाट्य-निर्देश भाई संतोष राजपूत जी ने प्ले से हटा दिया था. खेल टीचर जिन पर अनुशासन बनाए रखने की भीषण जवाब देही बाय डिफाल्ट होती है से भाई अक्षय ने किसी मुद्दे पर नाराज़ होकर अपनी नाराज़गी को डिफ्यूज करने की गरज से बालभवन में भयानक टाइप का सुतली बम फोड़ा पकड़ा भी गया सज़ा भी मिली . ये वही बच्चा है जो अब एम.पी.एस.डी. भोपाल का विद्यार्थी है. नाटक की लगन इसे ऐसा विद्यार्थी बना दिया है जो खुद कर कर के बहुत कुछ सीख