Daughters Day

#Daughters_Day
मेरे कांधे पर जिस बेटी का सिर है वह है Shivani Billore बेटियों पर गर्व करना यह सारी बेटियां अब काम कर रही हैं मुझे गर्व है कि मेरी बड़ी बेटी शिवानी अगले दो-तीन दिनों में कंपनी की ओर से पुनः एक बार विदेश यात्रा पर होगी इस बार शिवानी जा रही है बेल्जियम के ब्रुसेल्स शहर में जो बेल्जियम की राजधानी है बीच में उसे उसे दुबई भी जाना था किंतु कंपनी की जो भी परिस्थिति रही हो शिवानी Ey में सीनियर एसोसिएट के पद पर पदस्थ है।

बहुत कम वजन था जन्म के समय शिवानी का । शायद एक किलोग्राम , बाल विकास विभाग के अधिकारी के रूप में मेरे लिये शर्मनाक घटना थी । पर कभी भाग्य ही साथ न दे तो हम क्या कर सकते हैं । अक्सर डॉक्टर्स से उसके मज़बूत होने वजन बढ़ाने के तरीके घर के सभी लोग पूछा करते थे । किसी भी स्थिति में डॉक्टर्स कोई तरीका न खोज पाए । आज भी दुःख होता है कि काश जन्म के समय उसका वजन 2.5kg होता शायद हमारी देखभाल में कोई बड़ी कमी रही होगी । 
शिवानी पढ़ने में तेज थी पर गणित से मेरी तरह 36 का नाता था उसका । 10वीं क्लास में शिवानी ने कहा दिया था कि वह साइंस नहीं पढ़ेगी । मेरा समर्थन पा कर बहुत उत्साहित थी  ।
कॉमर्स एवम आर्ट्स  के बच्चों के प्रति सामाजिक नज़रिया बहुत निगेटिव रहा था । मुझे  भी ज्ञानी जन ज्ञान देना और उलाहना देना नहीं भूलते थे । कुछ तो यह तक कहा करते थे - क्यों आप ने बच्ची की बात सुनी कॉमर्स में क्या स्कोप हैं । हमारा बेटा या बेटी की उपलब्धियां देखिये , उनकी तपस्या देखिये आपने तो अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली । सायन्स पढ़ाना था बेटी को ..!
      मुझे उनकी अज्ञानता पर केवल मुस्कुराहट का सहारा लेना होता था । मेरी पत्नी को भी बेटी पर भरोसा था । और हम दौनों बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध कुछ भी नहीं स्वीकारना चाहते थे ।
 कृतज्ञ हूं शिवानी के गुरुजनों का जॉय किंडर गार्डन के श्री प्रवीण मेबैन जो मेरे मित्र भी हैं के स्कूल में शिवानी की शिक्षा प्रारंभ हुई कठोर अनुशासन मेहनत लगन के साथ श्री प्रवीण मेंबेन ने शिवानी में आत्मविश्वास जगाया तो फिर आगे की जिम्मेदारी निभाई जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने जहां इसकी बुनियाद मजबूत हुई ।
शिवानी कंपनी में सिर्फ बीकॉम ऑनर्स अर्थात सामान्य सा कॉमर्स ग्रेजुएशन के दौरान ही Ey द्वारा कैंपस के जरिए सिलेक्ट कर ली गई ।
शिवानी Ey ग्लोबल में एसोसिएट चुनी गई मध्य प्रदेश से केवल दो बेटियां चुनी गई थी बच्चों का यह मानना है कि कॉमर्स में बहुत ज्यादा स्कोप नहीं होती परंतु ऐसा नहीं है भाग्य और उससे पहले अपनी मेहनत तथा सब के आशीर्वाद से आपकी खाते में जो लिखा है जो आपने अपने खाते में अपनी मेहनत से जो भी कुछ लिख लिया है उसकी बदौलत आप सब कुछ हासिल कर सकते हैं शिवानी छह माह के बाद फिर वापस आएगी साल में कम से कम एक बार 6 माह के लिए उसे विदेश में कहीं ना कहीं जाने का यह दूसरा अवसर है

मित्रों बेटियों को सशक्त बनाने के लिए उन्हें अवसर देने की जरूरत है और उससे ज्यादा जरूरत है उन पर विश्वास करने की मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था परंतु मैंने शिक्षण संस्था का चुनाव करने से पहले अपनी बेटी को यह समझा दिया था कि अगर आईपीएस इंदौर में मुझे कोई विशेषता ना दिखी तो हमें जबलपुर वापस किसी सरकारी कॉलेज में प्रवेश लेना होगा बेटी ने सहमति दी इंदौर के कई कॉलेजेस में मैंने विजिट किया एक कॉलेज ने मुझे बताया कि उनके कॉलेज में अभिषेक बच्चन आते हैं तो मेरा प्रतिप्रश्न था कि क्या आपका कॉलेज दंत मंजन है या कोई प्रोडक्ट जिसमें हम जैसे मध्यम वर्गीय लोगों को आकर्षित करने के लिए आप फिल्म स्टारों को बुलाते हैं मुझे लगता है कि आपका कॉलेज मेरी बेटी के लायक नहीं है ऐडमिशन इन चार्ज मुझे बाहर तक मनाने की कोशिश करने आए किंतु मेरा दृढ़ निश्चय था कि ऐसे संस्थान जहां यह कोशिश की जाती होगी सीटों को बेचने के लिए विभिन्न तरह के हथकंडे अपनाकर अभिभावकों को मोहित करना और बेवकूफ बनाना उनका मौलिक सिद्धांत हो उन कॉलेजेस में संस्थानों में बच्चों को प्रवेश दिलाने की जरूरत क्या है ।
  मैंने बहुतेरे कालेजों में भ्रमण किया वहां के बच्चों का ज्ञान स्तर नापा उन से चर्चा करके अंत में जब आईपीएस अकैडमी मऊ रोड इंदौर गया । मुझे लगा वहां भी ऐसा ही कुछ होगा तू बड़े बेरुखी मन से अपनी श्रीमती और बेटी से कहा तुम लोग फार्म खरीद कर लाओ तब तक मैं बच्चों से बात करता हूं ।
फिर बच्चों से बातों का सिलसिला शुरू किया ।
भारत की इकोनामिक फॉरेन पॉलिसी पर चर्चा की ।
भारत के इकोनामिक डेवलपमेंट पर साथ ही साथ भारत की व्यवसायिक एवं वित्तीय स्थिति पर चर्चा में बच्चों ने बेहद उत्साह के साथ जवाब दिए तब जा कर मैं मैंने अपनी बेटी का दाखिला कराने का मन बना लिया ।
अपने बुजुर्गों के आशीर्वाद का मेरी मातोश्री स्वर्गीय सब्यसाची प्रमिला देवी बिल्लौरे पिताश्री काशीनाथ जी बिल्लौरे सभी बुजुर्गों का का आशीर्वाद है मेरी दोनों बेटियां बेटों से कम नहीं इतना ही नहीं मेरी बेटियां मेरे कार्य क्षेत्र में भी मौजूद है एक से एक संघर्षशील और अपने कार्य के प्रति सजग आत्मविश्वास से भरी हुई बाल भवन में मुझे मिलती है मैंने प्रयास से ही किया है कि जितना ज्यादा सबल हम बेटियों को बनाएंगे उतना अधिक यह देश तरक्की करेगा विजन बिल्कुल साफ है महिला सशक्तिकरण की बात से पहले अपनी बेटी को सक्षम बनाने की सोच को विकसित करने की जरूरत है ।
मुझे विश्वास है कि ना सिर्फ आप शिवानी को आशीर्वाद देंगे बल्कि आप भी अगर कहीं कमजोर महसूस करते हैं की बेटी है तो उसे एक्स्ट्रा संरक्षण की जरूरत है मुझे नहीं लगता की बेटियां कमजोर है आपको उस से संभल देते रहना होगा और उसे जीवन प्रबंधन की स्केल से भर देना होगा

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